मन का चश्मा साफ हो तो संसार ठीक दिखाई देता है
एक ही संसार मन की अवस्था के अनुसार अलग-अलग दिखाई देता है। जैसे रंगीन चश्मा पहनने पर संसार उसी रंग का दिखता है।
चिंतित मन संसार को चिंताजनक बना देता है। क्रोधित मन संसार को कठोर दिखाता है। पर निर्मल मन संसार के भीतर शांति देखता है।
इसलिए संसार को ठीक से देखना हो, तो पहले अपने मन का चश्मा साफ करना होता है। केवल संसार से अपने मन के अनुसार बदलने की अपेक्षा पर्याप्त नहीं है।
अभ्यास और ध्यान इसी चश्मे को साफ करने का मार्ग हैं। उनसे मन अधिक स्वच्छ, प्रज्ञावान और करुणामय बनता है।
आज अभ्यास और ध्यान से मन का चश्मा साफ करें, और दिन को निर्मल, प्रज्ञावान और करुणामय मन से देखें।
एक ही संसार मन की अवस्था के अनुसार अलग दिखता है। रंगीन चश्मे से संसार उसी रंग में दिखता है; चिंतित मन संसार को चिंताजनक बनाता है, और निर्मल मन उसमें शांति देखता है। आज अभ्यास और ध्यान से मन का चश्मा साफ करें।