आज का वचन

सीखने और खोजने का शांत उत्साह न खोएं

2026 . 02 . 20

जीवन सीखने और खोज की निरंतर प्रक्रिया है। यदि हम हर क्षण जागृत हैं, तो बहुत छोटी समझ या ध्यान में भी शांत उत्साह उठ सकता है।

वह उत्साह इंद्रिय-सुख से भिन्न है। यह स्वादिष्ट वस्तु खाने या मनचाही चीज़ पाने की खुशी नहीं, बल्कि वह हल्की आभा है जो तब महसूस होती है जब प्रज्ञा का द्वार थोड़ा खुलता है और भीतर नई समझ जन्म लेती है।

इसी कारण हमें अभ्यास और अध्ययन जारी रखना चाहिए। जो व्यक्ति मन को देखता और सीखता है, वह दैनिक क्षणों में नयापन खोजता है, और वह खोज प्रयास जारी रखने की शक्ति बनती है।

आज केवल बाहरी उत्तेजना के पीछे न चलें। सीखने और खोज से आने वाले शांत उत्साह से मन को उज्ज्वल करें।

प्रज्ञा सीखने वाले मन में शांत लेकिन गहरा उत्साह होता है।

वह उत्साह इंद्रिय-सुख से भिन्न है। यह स्वादिष्ट वस्तु खाने या मनचाही चीज़ पाने की खुशी नहीं, बल्कि वह हल्की आभा है जो तब महसूस होती है जब प्रज्ञा का द्वार थोड़ा खुलता है और भीतर नई समझ जन्म लेती है। इसी कारण हमें अभ्यास और अध्ययन जारी रखना चाहिए। जो व्यक्ति मन को देखता और सीखता है, वह दैनिक क्षणों में नयापन खोजता है, और वह खोज प्रयास जारी रखने की शक्ति बनती है।

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सीखने और खोजने का शांत उत्साह न खोएं
सीखने और खोजने का शांत उत्साह न खोएं कार्टून
साधक अनेक उत्तेजनाओं के बीच थका बैठा है।
आचार्य शांत मेज़ और छोटी तारों-ज्योति दिखाते हैं।
एक वाक्य समझ में आ जाता है और भीतर एक हल्की सी रोशनी जल उठती है।
साधक उत्साह से चिपकता नहीं, फिर अध्ययन करता है।
छोटे-छोटे तारे भोर के आकाश में सीखने के पथ की तरह रेखाबद्ध होते हैं।