विश्वास कर प्रवाह का अनुसरण करने का मार्ग
आज आचार्य ने उस साधक के मन की बात की जो सही शिक्षा पर भरोसा कर एक दिशा में चलता है, जैसे चालक कठिन सड़क पर मार्गदर्शन पर भरोसा करता है। संसार की सड़कें जटिल होती जाती हैं, और कई बार अकेले गंतव्य पाना कठिन होता है। इसलिए हम विश्वसनीय मार्गदर्शन का अनुसरण करते हैं और जहाँ पहुँचना चाहिए वहाँ पहुँचते हैं।
बौद्ध साधना में यह भरोसा भी महत्वपूर्ण आरंभ है। जब बुद्ध की शिक्षा, धर्म और संघ में दृढ़ श्रद्धा उठती है, मन आसानी से दूसरे रास्तों पर नहीं डगमगाता। संदेह घटता है और दिशा स्पष्ट होती है, तो साधना अस्पष्ट प्रयास नहीं रहती; वह अपने गंतव्य की ओर बहता मार्ग बनती है।
आचार्य ने इसे धारा-प्रवेशी के मन से भी जोड़ा। धारा-प्रवेशी वह है जिसने धारा में प्रवेश किया है। वह अभी पूर्ण गंतव्य तक नहीं पहुँचा, पर सही धारा में प्रवेश कर चुका है, इसलिए जागरण की दिशा में आगे बढ़ता रहता है।
जैसे नदी कई मोड़ों से गुजरकर अंततः समुद्र की ओर बहती है, वैसे ही सही शिक्षा पर भरोसा करने और स्थिर साधना करने वाला मन प्रज्ञा के समुद्र की ओर बढ़ता है। महत्वपूर्ण यह है कि बीच में दूसरी दिशा में न बहें, बल्कि हर दिन जागते हुए एक-एक कदम चलें।
आज मन का मार्ग जटिल लग सकता है। जितना ऐसा लगे, बुद्ध की शिक्षा को अपने मन का मार्गदर्शन बनाएँ और अभी उठाने योग्य एक कदम न चूकें। जब भरोसा और स्थिरता इकट्ठे होते हैं, हम पहले से ही गंतव्य की ओर बहती धारा में खड़े होते हैं।
जटिल रास्ते पर सही मार्गदर्शन पर भरोसा कर चलें तो गंतव्य तक पहुँचते हैं। वैसे ही बुद्ध की शिक्षा पर भरोसा कर स्थिर साधना करने वाला साधक मार्ग नहीं खोता। धारा-प्रवेश वह मन है जो उस प्रवाह में प्रवेश कर चुका है। आज एक जागरूक कदम से प्रज्ञा के समुद्र की ओर बढ़ें।