कारण-फल को देखें और मन को सीधे जानें
हम सब सुख चाहते हैं। बौद्ध धर्म कहता है कि कारण होने से फल होता है। यदि सुख नामक फल चाहिए, तो सुख के कारण बनाने होंगे।
शुभ कारण हो तो शुभ फल आता है, अशुभ कारण हो तो दुखद फल आता है। संसार के जीवन में कारण और फल स्पष्ट रूप से काम करते हैं।
लेकिन अधिक गहराई से अध्ययन करें तो दिखता है कि कारण और फल नाम तथा उनके भेद भी मन ने लगाए हैं। मन नाम बनाता है, अवधारणाएँ खड़ी करता है, और उन्हें पकड़ता है।
इसलिए साधना शुभ कारण बनाने पर ही नहीं रुकती। यह भी देखना आवश्यक है कि मन कैसे नाम लगाता और भेद बनाता है।
आज पहले अच्छे शब्दों और शुभ कर्मों से सुख के कारण बनाएँ। फिर एक कदम और भीतर जाएँ, और उन सब निर्णयों और नामों को उठाने वाले मन को शांत होकर देखें।
सुखी होने के लिए सुख के कारण चाहिए। शुभ कारण शुभ फल देते हैं, अशुभ कारण दुखद फल। पर गहराई से देखें तो कारण और फल के नाम और भेद भी मन से बने हैं। साधना शुभ कारण बनाने और नाम-भेद उठाने वाले मन को सीधे देखने तक जाती है।