आज का वचन

मन में घाव न हो तो विष प्रवेश नहीं कर पाता

2025 . 11 . 20

धम्मपद में कहा गया है कि जैसे हाथ में घाव न हो तो विष छूने पर भी हानि नहीं करता, वैसे ही जो बुराई नहीं करता उसे बुराई नहीं पहुँचती। जैसे विष घाव से भीतर जाता है, वैसे ही मन की दरारें और डगमगाहट हमें अधिक दुखी बना सकती हैं।

साधना करते समय असंख्य भ्रमित विचार और सामान्य विचार उठते और मिटते हैं। बहुत विचार होना यह नहीं बताता कि साधना टूट गई। महत्वपूर्ण बात है उन विचारों को पहचानना और फिर एकाग्रता में लौटना।

जब मन जटिल और बहुत कर्म से भरा लगे, तब भी यदि हम पहचानते रहें और साधना करते रहें, तो वह जटिलता हमें पूरी तरह नहीं हिला सकती। भ्रमित विचार आते-जाते रहें, पर उनसे पकड़े न जाएँ तो वे गुजरते बादलों की तरह बह जाते हैं।

दुनिया में अनेक बातें होती हैं, और लोगों के बीच भी बहुत डगमगाहट है। पर यदि मेरे मन में बड़ा घाव और खाली दरार नहीं है, तो बाहरी घटनाएँ जहर की तरह सीधे भीतर नहीं उतरतीं।

आज दुनिया को दोष देने से पहले अपने मन के घाव और दरारें देखें। सजगता और निरंतर साधना से मन को दृढ़ रखें, तो बहुत विचारों और कठिन स्थितियों के बीच भी भीतर से ठीक रह सकते हैं।

दुनिया जटिल हो, फिर भी सजगता और स्थिर साधना भ्रमित विचारों व हानिकारक बातों को आसानी से हिलाने नहीं देती।

धम्मपद सिखाता है कि जैसे हाथ में घाव न हो तो विष नहीं फैलता, वैसे ही जो बुराई नहीं करता उसे बुराई नहीं पहुँचती। साधना में अनेक भ्रमित विचार उठें, फिर भी उन्हें पहचानकर एकाग्रता में लौटें तो वे मन को नहीं हिलाते।

AI समीक्षा पूर्ण · T3_major · AI पूर्व-समीक्षा के बाद प्रकाशित
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मन में घाव न हो तो विष प्रवेश नहीं कर पाता कार्टून
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