अभ्यास मन को साधने की आदत है
दस बैल-पालन चित्रों में बैल को पकड़ना मन को पकड़कर अभ्यास के मार्ग की ओर लौटा लाने की प्रक्रिया है। पर बैल को पकड़ लेने का अर्थ यह नहीं कि वह तुरंत साध गया। जैसे लंबे समय तक खेतों में दौड़ता बैल एकदम शांत नहीं होता, वैसे ही मन की पुरानी आदतें रातों-रात नहीं बदलतीं।
लोभ, क्रोध, मोह और लंबे समय से बनी आदतें हमारे मन में गहराई तक बैठी होती हैं। इसलिए एक बार अच्छे वचन सुन लेने या थोड़ी देर ध्यान में बैठने से मन पूरी तरह नहीं बदलता। हमें ऐसा अभ्यास चाहिए जो बार-बार देखे और बार-बार लौट आए।
यदि बैल को रोज एक निश्चित समय पर नमक दिया जाए, तो वह धीरे-धीरे उसी समय लौटने लगता है। इसी तरह अभ्यास में अच्छी आदतें स्थापित करना महत्त्वपूर्ण है। प्रतिदिन निश्चित समय पर मन को सँभालना, धर्म-वचन पढ़ना और करुणा से कर्म करना, मन को थोड़ा-थोड़ा कोमल बनाते हैं।
यदि हम दबाव से मन को वश में करने की कोशिश करें, तो वह और कठोर हो सकता है। महत्त्व स्थिरता का है। बिना टूटे चलने वाला सौम्य अभ्यास मन की दिशा बदलता है और कठोर आदतों को अच्छी आदतों में बदलता है।
आज मन को बलपूर्वक चलाने के बजाय एक-एक अच्छी आदत स्थापित करें और दिन भर मन को सही ढंग से साधें।
मन केवल एक बार पकड़े जाने से तुरंत नहीं सधता। पुरानी आदतें निरंतर अभ्यास और अच्छे दोहराव से धीरे-धीरे बदलती हैं। आज कोमल और अखंड प्रयास से मन को साधें।