आज का वचन

सांसारिक स्थितियाँ डगमगाएँ तब भी समता बनाए रखें

2025 . 10 . 14

जीवन में लाभ और हानि, प्रशंसा और निंदा, सुख और दुख बारी-बारी से आते हैं। यदि हम सजगता न रखें, तो मन इन स्थितियों से डगमगा जाता है। पर यदि हम जागरूक होकर देखते हैं, तो समता बनाए रख सकते हैं।

सांसारिक स्थितियाँ हमेशा बदलती रहती हैं। जो मिला है वह भी बीतता है, जो खोया है वह भी बीतता है। प्रशंसा सदा नहीं रहती, और निंदा भी हमारा पूरा सत्य नहीं है।

जब ये हवाएँ मन को हिलाती हैं, तो हम अपना केंद्र भूल सकते हैं। सजगता दीपक की तरह हमें फिर दिखाती है कि मन कहाँ खड़ा है।

समता उदासीनता नहीं है। यह वह स्थिरता है जो परिवर्तन को देखती है, पर उसके साथ बह नहीं जाती।

आज संसार की हवाओं के बीच मन का केंद्र न खोएँ।

सांसारिक स्थितियाँ उठती-गिरती रहती हैं, पर सजगता से हम समता बनाए रख सकते हैं।

जीवन में लाभ-हानि, प्रशंसा-निंदा, सुख-दुख बारी-बारी से आते हैं। सजगता न हो तो मन उनसे डगमगाता है, पर जागरूक होकर देखने से समता बनी रहती है। आज मन का केंद्र न खोएँ।

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